जनपद में राजस्व न्यायालयो में न्याय के लिए वादकारी भटकते रहते हैं । न्याय की मंशा पाले हुए वाद कारी राजस्व न्यायालय के चक्कर लगाते है । कुछ मामलों में तो बाद कारी चक्कर लगाते लगाते थक कर घर बैठ गए उनके स्थान पर दूसरी पीढ़ियां वाद की पैरवी में आने लगी है ।यह वाक्य मुकदमा लड़ने वाला हर व्यक्ति लगभग कहते हुए मिल जाता है। लेकिन कुछ मामले ऐसे भी होते हैं जिसमें एकपक्षीय कार्यवाही के वाद को निपटा जा सकता है । अमेठी जनपद के राजस्व विभाग में अधिकारियों का मन:स्थिति कुछ विचित्र हो गई है । गैर विवादित फाइलों को निर्मित करने के लिए अधिकारियों द्वारा रुचि नहीं दिखलाई जाती है । सूत्रों की मानें तो गैर विवादित पत्रावली पर आदेश अंकित करने के लिए फर्जी अपत्तिकर्ता द्वारा तैयार कर आपत्तियां दाखिल की जाती रही है । इस मामले पर माननीय हाई कोर्ट द्वारा समय-समय पर दिशा निर्देशन दिए जाने के बावजूद भी राजस्व अधिकारियों के कान पर जूं नहीं रेंगती है । अमेठी जनपद राजस्व न्यायालयो में अधिवक्ताओं की न्यायिक कार्यों से विरत रहने की क्रियाकलाप आए दिन होते रहते हैं।
जनपद में राजस्व अधिकारियों का आलम कुछ इस तरह है कि राज्य से संबंधित पत्रावलियों महीनोंं आदेश के इंतजार में रखी रह जाती हैं । यदि पीठासीन अधिकारियों द्वारा कोई आदेश पारित भी कर दिया जाए तो उसको राजस्व रजिस्टर में अंकित करने के लिए 4 माह का समय लग जाना साधारण बात हो गई है सूत्र बताते हैं कि जब कोई पक्षकार पत्रावली के आदेश को राजस्व अभिलेख में अंकित करवाने के लिए तहसील की परिक्रमा करके थक जाता है तो राजस्व कर्मचारी उससे कार्य करने के बदले कुछ अन्य मनोभाव पा लेते हैं ।राजस्व के कर्मचारी न्यायालय के आदेशों व अपने उच्च अधिकारियों का आदेश मानने को भी कतराते हैं। जब तक उनकी ऊपर किसी बड़े अधिकारी का निर्देश ना हो तब तक पत्रावली में कार्रवाई नहीं हो पाती है । पत्रों में हुए आदेशों का पालन करने के लिए बहाना बनाकर टाल दिया जाता है । अगर इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों से पूछा जाए तो वह सरकारी काम अति शीघ्र निपटाने का बहाना बताने लगते हैं ।अब प्रश्न खड़ा होता है कि जिन मामलो में आदेश या कार्रवाई की गई है । उसका राजस्व अभिलेखों में दर्ज होने क्या किसी व्यक्ति के हित में है ? इसका उत्तर शहजता से ही मिल जाता है नहीं ।क्योंकि जिस पत्रावली पर राजस्व के अधिकारियों के निर्देशन में होता है वह कार्य निजी कार्य नहीं है वह भी सरकारी कार्य की श्रेणी में आता है लेकिन राजस्व मामलों में अमेठी जनपद में अधिकारियों द्वारा आम जनता को परेशान किया जाता है।यह भी एक सच्चाई हैं।
Social Plugin